कृत्रिम बुद्धिमत्ता और युवाओं की रोजगार आकांक्षाओं में परिवर्तन: अम्बेडकरनगर जिले के युवाओं का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64171/JSRD.5.2.88-92Keywords:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, युवा, रोजगार आकांक्षा, रोजगार सुरक्षा, कौशल, तकनीकी परिवर्तन, अम्बेडकरनगरAbstract
वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, व्यापार, प्रशासन, संचार तथा रोजगार जैसे सामाजिक जीवन के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है। विशेष रूप से युवाओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ रोजगार की सुरक्षा, आवश्यक कौशल तथा भविष्य के पेशागत विकल्पों से जुड़े नए प्रश्न भी उत्पन्न कर रही है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य अम्बेडकरनगर जिले के युवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति जागरूकता, इसके संभावित रोजगार प्रभाव तथा रोजगार संबंधी आकांक्षाओं में हो रहे परिवर्तनों को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझना है।
अध्ययन के लिए अम्बेडकरनगर जिले के 50 युवाओं को उद्देश्यपूर्ण एवं सुविधानुसार नमूना चयन के माध्यम से शामिल किया गया। प्राथमिक सूचनाएँ प्रश्नावली एवं प्रत्यक्ष बातचीत के माध्यम से प्राप्त की गईं। अध्ययन में 18 उत्तरदाता ग्रामीण तथा 32 उत्तरदाता शहरी अथवा अर्ध-शहरी क्षेत्र से संबंधित थे। आयु की दृष्टि से 20–25 वर्ष के 24, 26–30 वर्ष के 15 तथा 31–35 वर्ष के 11 उत्तरदाता शामिल थे।
अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल रोजगार समाप्त करने वाली तकनीक के रूप में नहीं देखते, बल्कि इसके माध्यम से नए रोजगार अवसर उत्पन्न होने की संभावना भी स्वीकार करते हैं। लगभग 68 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मत था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता नए रोजगार अवसर पैदा कर सकती है। दूसरी ओर लगभग 70 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। लगभग 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि भविष्य के रोजगार के लिए नए कौशल सीखना आवश्यक होगा। रोजगार की प्राथमिकता में सरकारी नौकरी सबसे ऊपर रही, जिसे 22 उत्तरदाताओं ने चुना। इसके बाद निजी क्षेत्र, स्वरोजगार अथवा व्यवसाय तथा डिजिटल अथवा ऑनलाइन कार्य जैसे विकल्प सामने आए।
अध्ययन से यह भी पता चलता है कि कम आयु के युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक दिखाई देते हैं तथा शहरी एवं अर्ध-शहरी युवाओं में इसके प्रति जागरूकता और उपयोग ग्रामीण युवाओं की अपेक्षा अधिक है। इस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता युवाओं की रोजगार आकांक्षाओं में अवसर और असुरक्षा दोनों को एक साथ प्रभावित कर रही है।
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