गंगा-यमुना घाटी के स्रोत प्रदेशों की विशिष्ट भवन स्थापत्य विरासतः भूकम्परोधी
DOI:
https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.33-37Keywords:
सुमेर, चौखट, पुरा भूकम्परोधी तकनीक, धाड़ा, परम्परागत, स्थापत्यAbstract
ऐतिहासिक एंव सांस्कृतिक परम्पराओं से अभिभूत गंगा-यमुना नदी घाटी के स्रोत प्रदेश नदी घाटी क्षेत्र की धर्म, इतिहास, संस्कृति व साहित्य एवं स्थापत्य कला के क्षेत्र में अपनी एक पृथक पहचान रही है। देवात्मा स्वरूप हिमालय की चोटियाॅ तथा जीवन दायिनी पवित्र नदीयाॅ गंगा, यमुना के स्रोतो के प्रति भारतीय जनों में सदियो से ही श्रद्धा आकर्षण एवं जिज्ञासा रही है, फलतः अनेक ऋषि मुनियों, तपस्वियों एवं साहित्यिक साधकों व वाह्य जातियों के लिए यह विषम भौगोलिक पारिस्थिकीय क्षेत्र आश्रय बना रहा, वाहय जातियाॅ इस भू-भाग से प्रभावित हुई परिणामतः द्वितीय सहस्त्राब्दी ई0 पूर्व के मध्य में अनेक वाहय जातियो का आगमन इन घाटी क्षेत्रो में होना प्रराम्भ हुआ तथा अधिकांश ने इसी भू-भाग को अपना आधिवास बनाया।
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