मध्य हिमालय की परम्परागत भूकम्परोधी भवन स्थापत्य विरासत का अध्ययन (यमुना–टौंस नदी घाटी के विशेष सन्दर्भ में)

Authors

  • डाॅ0 सुशील कुमार कगडियाल असिस्टेंट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, रा0 स्नात0 महाविद्यालय नरेन्द्र नगर टिहरी, गढवाल, उत्तराखंड, भारत

DOI:

https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.33-37

Keywords:

सुमेर, चौखट, पुरा भूकम्परोधी तकनीक, धाड़ा, परम्परागत, स्थापत्य

Abstract

ऐतिहासिक एंव सांस्कृतिक परम्पराओं से अभिभूत गंगा-यमुना नदी घाटी के स्रोत प्रदेश नदी घाटी क्षेत्र की धर्म, इतिहास, संस्कृति व साहित्य एवं स्थापत्य कला के क्षेत्र में अपनी एक पृथक पहचान रही है। देवात्मा स्वरूप हिमालय की चोटियाॅ तथा जीवन दायिनी पवित्र नदीयाॅ गंगा, यमुना के स्रोतो के प्रति भारतीय जनों में सदियो से ही श्रद्धा आकर्षण एवं जिज्ञासा रही है, फलतः अनेक ऋषि मुनियों, तपस्वियों एवं साहित्यिक साधकों व वाह्य जातियों के लिए यह विषम भौगोलिक पारिस्थिकीय क्षेत्र आश्रय बना रहा, वाहय जातियाॅ इस भू-भाग से प्रभावित हुई परिणामतः द्वितीय सहस्त्राब्दी ई0 पूर्व के मध्य में अनेक वाहय जातियो का आगमन इन घाटी क्षेत्रो में होना प्रराम्भ हुआ तथा अधिकांश ने इसी भू-भाग को अपना आधिवास बनाया।

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वही,: पृ0 47-48.

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Published

2026-05-29

How to Cite

[1]
कगडियाल स. क., “मध्य हिमालय की परम्परागत भूकम्परोधी भवन स्थापत्य विरासत का अध्ययन (यमुना–टौंस नदी घाटी के विशेष सन्दर्भ में)”, J. Soc. Rev. Dev., vol. 5, no. Special Issue 3, pp. 33–37, May 2026.