गढवाल में नाग पूजा परम्पराः एक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.75-78Keywords:
गढ़वाल, नागपूजा, लोकधर्म, लोकदेवता, नागराजा, जागरAbstract
उत्तराखण्ड के गढ़वाल हिमालय की धार्मिक-सांस्कृतिक परम्पराओं में नागपूजा का विशिष्ट स्थान है। यह परम्परा केवल आस्था या विश्वास का परिणाम नहीं, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण, सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक चेतना से गहराई से जुड़ी हुई है। गढ़वाल क्षेत्र में नागदेवता को जल, भूमि, वर्षा, उर्वरता, रोग-निवारण और ग्राम-सुरक्षा से सम्बन्धित देवता माना जाता है। यहां नाग केवल एक जीव मात्र नहीं, बल्कि ‘क्षेत्रपाल’ या ‘ग्राम-देवता’ के रूप में पूजनीय है। गढ़वाल की ‘जागर’ गायन परम्परा में ‘नागराज’ के अवतरण और उनके सांस्कृतिक प्रभाव की भी इस शोधपत्र में विवेचना की गई है। नागपूजा की परम्परा वैदिक, पौराणिक तथा लोकधाराओं के समन्वय से विकसित हुई है। पुराणों में वर्णित नागपूजा की यह परम्परा वर्तमान में भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी पूर्व में थी।
प्रस्तुत शोधपत्र मेें गढ़वाल क्षेत्र में नागपूजा के उद्भव, ऐतिहासिक विकास, पौराणिक एवं लोकाधार, प्रमुख नागदेवताओं और उनके मन्दिरों, अनुष्ठानों, पर्वों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व का विश्लेषण किया गया है।
References
मैत्रायणी संहिता, 2.7.15
अगुन्तर निकाय, 2, पृ0 72
फग्र्युसन, जेम्स, ट्री एण्ड सर्पेन्ट वर्शिप, एशियन एजुकेशनल सर्विसेज, नई दिल्ली, 1973, पृ0 3
फग्र्युसन, जेम्स, वही, पृ0 5
वेक, स्टेनीलैन्ड, सर्पेण्ट वर्शिप एंड अदर एशेस, जाॅर्ज रेडवे, लन्दन, 1888, पृ0 87-88
वेक, स्टेनीलैन्ड, वही, पृ0 83
फग्र्युसन, जेम्स, वही, पृ0 48
फग्र्युसन, जेम्स, वही, पृ0 5
वेक, स्टेनीलैन्ड, वही, पृ0 106
जसटा, हरिराम, प्राचीन भारत में नागपूजा और परम्परा, सन्मार्ग प्रकाशन दिल्ली, 1982, पृ0 30
महाभारत, आदिपर्व, पृ0 36
अग्रवाल, वासुदेव शरण, प्राचीन भारतीय लोकधर्म, पृथ्वी प्रकाशन वाराणसी, 1969, पृ0 68
कठोच, यशवन्तसिंह, उत्तराखण्ड का नवीन इतिहास, विनसर पब्लिशिंग कम्पनी देहरादून, 2010, पृ0 34
रतूड़ी, हरिकृष्ण, गढ़वाल का इतिहास, भागीरथी प्रकाशन गृह टिहरी, 1988, पृ0 121-122
डबराल, शिवप्रसाद, उत्तराखण्ड का इतिहास भाग-1, वीरगाथा प्रकाशन, दोगडा गढ़वाल, पृ0 299, 300
‘सिंह’, भजनसिंह, आर्यों का आदि निवास मध्य हिमालय, भागीरथी प्रकाशन गृह टिहरी, 1986, पृ0 291
उनियाल, हेमा, केदारखण्ड (धर्म, संस्कृति, वास्तुशिल्प एवं पर्यटन), तक्षशिला प्रकाशन, नई दिल्ली, 2016, पृ0 525
ममगाई, सीताराम, प्रसिद्ध नागतीर्थ सेम-मुखेम, शाश्वत प्रकाशन श्रीनगर गढ़वाल, 2008, पृ0 53
नैथानी, शिवप्रसाद, उत्तराखण्ड का सांस्कृतिक इतिहास, पवेत्री प्रकाशन श्रीनगर गढ़वाल, 2006, पृ0 190
ममगाई, सीताराम, वही, पृ0 53
डबराल, शिवप्रसाद, उत्तराखण्ड यात्रा दर्शन, वीरगाथा प्रकाशन, दोगडा गढ़वाल, पृ0 332
नैथानी, शिवप्रसाद, वही, पृ0 190
ममगाई, सीताराम, वही, पृ0 326
मैठाणी, वाचस्पति, गढ़वाल हिमालय की देव संस्कृति, गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा नई दिल्ली, 2004, पृ0 65-66
सेमवाल, उमा रमन, श्री गंगोत्री तीर्थक्षेत्र ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन, अभिनव प्रकाशन गंगोरी उत्तरकाशी, 2012, पृ0 112
रतूड़ी, हरिकृष्ण, वही, पृ0 121-122।
