समकालीन पारिवारिक मूल्यः राष्ट्र निर्माण के संदर्भ में
DOI:
https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.61-65Keywords:
पारिवारिक मूल्य, संयुक्त परिवार, एकल परिवार, राष्ट्र निर्माण, नैतिकता, आधुनिकता, वैश्वीकरण, समानताAbstract
आधुनिक समाज में पारिवारिक मूल्यों में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। पहले संयुक्त परिवार प्रणाली प्रचलित थी, जिसमें सहयोग, त्याग, सम्मान और सामूहिकता जैसे मूल्य प्रमुख थे। आज के समय में एकल (न्यूक्लियर) परिवारों की संख्या बढ़ने से व्यक्तिवाद, स्वतंत्रता और निजी जीवन को अधिक महत्व दिया जाने लगा है। इन बदलते मूल्यों का राष्ट्र निर्माण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। परिवार व्यक्ति का पहला विद्यालय होता है, जहाँ से वह नैतिकता, अनुशासन, जिम्मेदारी और सामाजिक व्यवहार सीखता है। यदि परिवार में सकारात्मक मूल्य जैसे सम्मान, सहिष्णुता, ईमानदारी और सहयोग सिखाए जाते हैं, तो वही गुण नागरिक के रूप में राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं। हालाँकि, आधुनिकता और वैश्वीकरण के प्रभाव से पारिवारिक संबंधों में दूरी, बुजुर्गों की उपेक्षा, और नैतिक मूल्यों में गिरावट जैसी समस्याएँ भी देखने को मिल रही हैं। इससे सामाजिक एकता और नैतिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिर भी, बदलते समय के साथ कुछ सकारात्मक परिवर्तन भी हुए हैं, जैसे महिलाओं की शिक्षा और स्वावलंबन, लैंगिक समानता, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का बढ़ना। ये परिवर्तन भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः आवश्यक है कि हम पारंपरिक और आधुनिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखें। मजबूत पारिवारिक मूल्य ही एक सशक्त, नैतिक और प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण की नींव होते हैं।
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