भारत की वैश्विक स्थिति को आकार देने में लघु, कुटीर एवं मध्यम वर्ग उद्योगों का योगदान (उत्तराखंड के विषेष संदर्भ में)

Authors

  • डाॅ0 सुनील दत्त असिस्टेंट प्रोफेसर, वाणिज्य विभाग, एम0 बी0 राज0 स्नात0 महा0 हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखण्ड, भारत
  • डाॅ0 संतोष कुमार आर्य असिस्टेंट प्रोफेसर, वाणिज्य विभाग, एम0 बी0 राज0 स्नात0 महा0 हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखण्ड, भारत

DOI:

https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.51-55

Keywords:

लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, रोजगार सृजन, मुद्रा अर्जन, आत्मनिर्भर भारत

Abstract

आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के अंतर्गत उत्तराखंड राज्य ने अपने आर्थिक विकास को सुदृढ करने हेतु अनेक नवीन नीतिगत पहलें की है। राज्य की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों एवं प्राकृतिक संसाधनों के कारण उत्तराखंड ने पर्यटन, कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) औषधीय एवं सुगंधित पौधो के उत्पादन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन क्षेत्रो के विकास ने न केवल राज्य की आंतरिक अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की है, बल्कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके योगदान को सशक्त किया है। विगत वर्षो में उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय में निरंतर वृद्वि दर्ज की गई है। जो राज्य की आर्थिक स्थिरता एवं विकासशील प्रवृत्ति को दर्शाती है। औद्योगिक इकाइयों की संख्या में हुई वृद्वि से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए है, जिससे स्थानीय जनसंख्या की आय एवं जीवन-स्तर में सुधार हुआ है। विशेष रूप से पर्यटन उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। जिसने सेवा क्षेत्र के विस्तार में प्रमुख भूमिका निभाई है। आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई है। इन योजनाअेां का मुख्य लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर उत्पादन क्षमता को बढाना व स्वरोजगार को प्रोत्साहन देना तथा कुटीर एवं लघु उद्योगों की सशक्त बनाना हैं। उत्तराखंड में इन नीतियों के क्रियान्वयन से कृषि-आधारित उद्योगों, हस्तशिल्प तथा स्वंय सहायता समूहों को विशेष बढावा मिला है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है। कि उत्तराखंड ने आत्मनिर्भर भारत की सोच को अपनाते हुए अपनी आर्थिक संरचना को नई दिशा प्रदान की है। राज्य की पारंपरिक क्षमताओं एवं आधुनिक विकास रणनीतियों के समन्वय से उत्तराखंड न केवल राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आत्मनिर्भर विकास के एक प्रेरणादायक माॅडल के रूप में उभर रहा है।

References

उपाघ्याय डाॅ0 वीना ग्रामीण क्षेत्रो के विकास में कृषि, कुटीर एवं लघु उद्योगों की भूमिका International Journal of Current Science (IJCSPUB), 2024, 14. ISSN: 2250-1770.

यादव नन्द किशोरः भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मघ्यम उद्योगों का योगदान Internationl Journal of Enhanced Research in Educational Development (IJERED) ISSN: 2320-8708, 2023, 11.

Mukherjee S. Challenges to Indian micro small scale and medium enterprises in the era of globalization. Journal of Global Entrepreneurship Research. 2018;8(28):1-19.

Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises. (2019), MSME Annual Report 2018-19.

Reserve Bank of India, Report of the Expert Committee on Micro, Small, and Medium Enterprises, 2019.

Kimothi SP, Sanjeev Panwar, And Anjani khulbe. Creating wealth from Agricultural Waste Creating Wealth from Agricultural Waste. Indian council of Agricultural Research, New Delhi, 2020, 172.

Ghinea C. Waste management models and their application to sustainable management of recyclable waste. Phd thesis, Gheorghe Asachi Technical University of lasi, Romania, 2012.

https://www.jetir.org

http://www.jmrd.com

http://cdnbbsr.s3waas.gov.in

नव भारत टाइम्स

हिन्दूस्तान

इक्नाॅमिक टाइम्स।

Downloads

Published

2026-05-29

How to Cite

[1]
दत्त स. and आर्य स. क., “भारत की वैश्विक स्थिति को आकार देने में लघु, कुटीर एवं मध्यम वर्ग उद्योगों का योगदान (उत्तराखंड के विषेष संदर्भ में)”, J. Soc. Rev. Dev., vol. 5, no. Special Issue 3, pp. 51–55, May 2026.