श्री गंगा जी का प्रदुर्भाव एवं भागीरथी ही गंगा, नाम की स्पष्टता
DOI:
https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.42-45Keywords:
गंगा, भागीरथी, विष्णुपदी, सुरसुरी, जाह्नवीAbstract
प्रस्तुत प्रपत्र में श्री गंगा जी के उद्गम का समावेश कर गंगा नाम को लेकर जो भ्रामिकता बनी है, उसे स्पष्ट करने पर चर्चा की गई है। गंगा नदी हमारे राष्ट्र की जीवनदायिनी नदी है, जो युगों-युगों से हमें आध्यात्मिक, वैश्विक मूल्यों एवं धर्म, कर्म आदि सभी प्रकार की आस्थाओं से जोड़े हुई है। लेकिन इनके गंगा नाम पर कुछ हद तक भ्रमित किया जा रहा है। वर्तमान समय में लोगों को बताया जा रहा है, कि गंगा देवप्रयाग से बनती है जो कीहमारे पौराणिक शास्त्रों के अनुसार प्रामाणिक नहीं है, पुराणों में को ही गंगा कहा है, जो गौमुख से निकल कर गंगा सागर तक अविरल बह रही है,वही गंगा है। उक्त प्रपत्र द्वारा मुख्य रूप से भागीरथी ही गंगा है। गंगा देवप्रयाग से नहीं बल्कि गौमुख गंगोत्री से उद्धृत है। इस शोध पत्र में मुख्य रूप से स्पष्ट किया जाएगा।
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