उत्तराखंड के परंपरागत ताम्रशिल्पकरो पर आधुनिकता का प्रभाव

Authors

  • डॉ0 रचना टम्टा समाजशास्त्र विभाग, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोपेश्वर, चमोली, उत्तराखंड, भारत

DOI:

https://doi.org/10.64171/JSRD.5.S3.20-21

Keywords:

ताम्रशिल्प, ताम्रकार, तांबा, परंपरागत

Abstract

भारतीय सामाजिक व्यवस्था में व्यवसाय को परंपरागत रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी व्यावसायिक परंपराओं के रूप में आगे बढ़ाया गया लेकिन धीरे-धीरे परिवर्तन की क्रांति की शुरुआत में इन परंपरागत व्यवसाययों पर अपना प्रभाव डाला और धीरे-धीरे उनकी पहचान पर संकट गहराने लगा उत्तराखंड में शिल्प के परंपरागत कार्य के आधार पर अपनी पहचान बनाने वाले लोगों को शिल्पकार कहा जाता है किंतु आज यह शिल्पी आधुनिकीकरण एवं नगरीकरण के फल स्वरुप अपनी पहचान के संकट से गुजर रहे हैं प्रस्तुत लेख के अंतर्गत उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा शहर में विलुप्त होती परंपरागत ताम्र शिल्प कला पर आधुनिकीकरण व नगरीकरण के प्रभाव को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

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Published

2026-05-29

How to Cite

[1]
टम्टा र., “उत्तराखंड के परंपरागत ताम्रशिल्पकरो पर आधुनिकता का प्रभाव”, J. Soc. Rev. Dev., vol. 5, no. Special Issue 3, pp. 20–21, May 2026.